• 0755-2854466, 2854649
  • mvm@mahaemail.com
ʺLet us mould your children′s future and prepare them for leadership in the worldʺ

भारत सर्वोच्च शक्तिशाली राष्ट्र है

"भारत अभी भी सर्वोच्च शक्तिशाली राष्ट्र है। भारत वेद भूमि-पूर्णभूमि-देवभूमि प्रतिभारत भारत है। यहाँ रामराज स्थापित रहा है, जहाँ भूतल पर स्वर्ग का अनुभव नागरिक कर चुके हैं। भारत के शाश्वत् सनातन सर्वोच्च वैदिक ज्ञान जीवन संचालन के समस्त नियमों, विधानों, प्रक्रियाओं से भरपूर हैं। व्यक्ति का जीवन समष्टि के ज्ञान और विज्ञान पर आधारित है। दूसरी तरफ ‘‘यथापिण्डे तथा ब्रह्माण्डे" इसकी पुष्टि कर देता है कि व्यक्ति और समष्टि दोनों एक से ही हैं। एक लघुरूप हैं दूसरा वृहद् रूप। भारत ही देवताओं का घर है। यहीं आवश्यकतानुसार धर्म स्थापना हेतु देवता मानव या अन्य शरीर धारण करके पृथ्वी पर जन्म लेते हैं।


यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।।


भारत ही प्रत्येक मानव मात्र में ईश्वर का अंश देखता है। भारत ही व्यक्ति को सर्वसमर्थ ओजस्वी तेजस्वी चेतनावान, ऊर्जावान, सृजनशील, बुद्धिमत्ता से पूर्ण देखता है। भारत ही ऋद्धि-सिद्धियों से तथा वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से भरा है और इनका उपयोग करके विश्व परिवार को सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, आनन्द, प्रबुद्धता, शाँन्ति, अजेयता प्रदान करना चाहता है। भारत अन्य बलशाली राष्ट्रों की तरह विध्वंसकारी आयुधों के बल पर महान नहीं है, यह अपनी सहृदयता, मानवीय सांस्कृतिक सिद्धाँतों, सहिष्णुता और मूल्यों के कारण महान है। भारत विश्व का पथ प्रदर्शक रहा है, अभिभावक की भूमिका, जगद्गुरू की भूमिका में रहा है। भारत के ज्ञानी, ऋषि-मुनि ही विश्व के समस्त देशों में जाकर वहां के नागरिकों को आध्यात्मिक और आधिदैविक ज्ञान विज्ञान की शिक्षा देते रहे हैं।


एतद्देशप्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मनः ।
स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरेन पृथित्यां सर्व मानवाः ।।


वेदों का ज्ञान और उसके जीवन पोषणकारी प्रयोग केवल भारत के पास हैं। आधुनिक भौतिक विज्ञान वेद विज्ञान से अबतक बहुत पीछे है। आधुनिक विज्ञान भारतीय वेद विज्ञान की पूर्णता के आगे बौना है। भारत का ज्ञान प्रकृति के नियमों-सृष्टि के संविधान से पोषित है। प्रकृति की सत्ता सर्वशक्तिमान है और इसका सहयोग भारत को है। इसीलिये भारत आज भी सर्वोच्च शक्तिशाली राष्ट्र है। दुर्भाग्य का विषय यह है कि भारतीय नेतृत्व स्वतंत्रता के बाद से ही विदेशी दासता के अपने संस्कारों से ग्रसित रहा है और भारतीय ज्ञान-विज्ञान का सहारा न लेकर भारतीय प्रजा के जीवन में समस्त क्षेत्रों में विदेशी पाश्चात्य सिद्धाँतों और प्रयोग को लगा दिया। परिणामस्वरूप पाश्चात्य सभ्यता के दुर्गण भारत में कानूनन आ गये। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, कृषि, पर्यावरण, पुनर्वास, व्यापार, वाणिज्य, नगर विन्यास व योजना आदि सभी क्षेत्र पाश्चात्य सिद्धाँतों की केवल प्रतिलिपि होकर रह गये। भारत सर्वोच्च शक्तिशाली आज भी है इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। भारतीय नेतृत्व ने पाश्चात्य सभ्यता का चश्मा लगा लिया था जिसके रहते उन्हें सब कुछ भारत के बाहर का तो नजर आया किन्तु अपने घर की विद्या, उसकी महानता, पूर्णता और मानवहितकारी प्रभाव उन्हें दिखे ही नहीं है। परिणाम स्पष्ट है, भारत सर्वोच्च शक्तिशाली ज्ञानवान होते हुए भी शक्तिशाली राष्ट्रों के पीछे-पीछे घूमता फिरता है। छोटे-छोटे दुर्बल राष्ट्र भी उसे आँखे दिखाते हैं। ज्ञान, विद्या, पूर्णता की अनदेखी और उपेक्षा का यह भयावह परिणाम है।


भारत सरकार और प्रान्तीय नेतृत्व को चाहिये कि वो भारतीय ज्ञान-विज्ञान को कानून बनाकर जीवन के हर क्षेत्र में समावेशित करें और फिर देखें कि कैसे भारत विश्व नेतृत्व कर सकेगा, सारे विश्व के लिये भाग्य विधाता बनेगा, जगद्गुरु की गरिमा पुनः स्थापित होगी और सारे विश्व भारतीय ज्ञान स्तम्भ के प्रकाश में प्रकाशित होगा।’ उक्त विचार परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी के प्रिय तपोनिष्ठ शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश जी ने महर्षि संस्थान से जुड़े श्रद्धालुओं के समूह को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।


ब्रह्मचारी ने भारत के समस्त नागरिकों का आव्हान करते हुए कहा कि ‘‘भारतीय नागरिक तो सभी धर्म परायण हैं, धर्म का पालन करने वाले हैं, सरकारें धर्म निरपेक्ष हैं, सेकुलर हैं, नागरिक अपने उत्थान के लिये सरकारों द्वारा कुछ किये जाने की प्रतीक्षा न करें। भारत के नागरिक स्वयं अपने और विश्व परिवार के उत्थान में समर्थ हैं। नित्य योगाभ्यास करें, योगस्थ होकर कर्म करें, सदाचार का पालन करें, ध्यान साधना करें, परस्पर मैत्री और सद्भाव रखें, अपने अपने धर्मों का ईमानदारी से पालन करें, गृहशान्ति करायें, देवताओं के सामयिक यज्ञानुष्ठान करें और करायें, यथाशक्ति जरूरतमन्दों की सहायता करें। कुछ समय में ही भारतवर्ष की कीर्ति पताका चहुँओर फैलेगी, सारा विश्व भारतीय ध्वज तले इकट्ठा होगा, भारत सर्वोच्च शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में पुनः मान्य होगा, जगद्गुरु के रूप में अपना दायित्व निभायेगा।’’


Scope & Reach

118
TOTAL CITIES
169
TOTAL SCHOOL
6500
TOTAL STAFF
100000
TOTAL STUDENTS

Contact Us

Maharishi Vidya Mandir
NATIONAL CAMP OFFICE
MCEE Campus, Building No. 5
Lambakhera, Berasia Road
Bhopal-462 018 (MADHYA PRADESH)
: 0755-2854466, 2854649
: 0755-2854158
: mvm@mahaemail.com

Copyright © 2001 Maharishi Vidya Mandir Group of Schools-India, All Rights Reserved
Web Solution By : Maharishi Information Technology Pvt. Ltd. || CWD Department
For website related valuable suggestions / feedback, please write to Web Manager

Web Site Hit Counter